| 20 वाँ फिम्डा-पीडीएआई वार्षिक सम्मेलन - बी.पी.कानूनगो | 192.00 kb |
| व्यापार युद्ध: क्या उह अवैश्वीकरण की पूर्वपीठिका है? - बी.पी.कानूनगो | 154.00 kb |
| वित्तीय स्थिरता के मार्ग में उभरती चुनौतियाँ - शक्तिकान्त दास | 188.00 kb |
| डिजिटल वित्तीय जगत में उपभोक्ता संरक्षण-की गई पहल और उससे आगे - एम.के.जैन | 209.00 kb |
| पुस्तक विमोचन पर गवर्नर महोदय की टिप्पणी - शक्तिकान्त दास | 162.00 kb |
| व्यवहार्य वित्तीय बाज़ारों का विकास – भारतीय अनुभव – विरल वी. आचार्य | 834.00 kb |
| राज्यपाल का उद्घाटन समारोह - वार्षिक सांख्यिकी दिवस सम्मेलन - शक्तिकान्त दास | 165.00 kb |
| शिकायत प्रबंधन प्रणाली के शुभारंभ पर गवर्नर महोदय का वक्तव्य - शक्तिकान्त दास | 142.00 kb |
| केंद्रीय बैंकों की बढ़ती हुई भूमिका - शक्तिकान्त दास | 226.00 kb |
| बैंकिंग परिदृश्य : वर्तमान स्थिति और भावी दिशा - शक्तिकान्त दास | 228.00 kb |
| वैश्विक पटल पर भारत का बढ़ता महत्व क्या यह लंबे समय तक बना रहेगा और क्या हम इसके लिए तैयार हैं ? – बी.पी. कानूनगो | 221.00 kb |
| 17 वाँ सी. डी.देशमुख स्मारक व्याख्यान: उदघाटन उद्बोधन - शक्तिकांत दास | 124.00 kb |
| उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं के समक्ष वैश्विक जोखिम एवं नीतिगत चुनौतियाँ - शक्तिकांत दास | 193.00 kb |
| फिनटेक के अवसर और चुनौतियाँ - शक्तिकांत दास | 228.00 kb |
| राजकोषीय संघवाद (फेडरलिजम) पर कुछ विचार - शक्तिकांत दास | 165.00 kb |
| सूक्ष्म ऋण और कैसे कोई लोक ऋण रजिस्ट्री इसे सुदृढ़ कर सकता है इसके संबंध में कुछ विचार - विरल वी. आचार्य | 370.00 kb |
| भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मोजूद नीतिगत मुद्दों पर चिंतन – शक्तिकांत दास | 260.00 kb |
| क्रेडिट जोखिम और बैंक पूंजी विनियमन पर मेरे विचार - श्री एन.एस. विश्वनाथन, उप गवर्नर द्वारा 29 अक्तूबर 2018 को एक्सएलआरआई, जमशेदपुर में दिया गया भाषण | 548.00 kb |
| स्वतंत्र विनियामकीय संस्थाओं का महत्व – केंद्रीय बैंक का मामला - डॉ. विरल वी. आचार्य, उप गवर्नर, भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा मुंबई में 26 अक्तूबर 2018 को दिया गया ए. डी. श्रॉफ स्मारक व्याख्यान | 319.00 kb |
| त्वरीत सुधारात्मक कार्रवाई : वित्तीय स्थिरता फ्रेमवर्क का एक अनिवार्य तत्व - डॉ विरल वी आचार्य | 648.00 kb |
| निर्वारक सतर्कता – सरकारी क्षेत्र के संस्थानों में सुशासन का सर्वप्रमुख साधन – डॉ. उर्जित. आर. पटेल | 208.00 kb |
| राज्य सरकार की बाजार उधारियाँ – मुद्दे और संभावनाएं –बी.पी.कानूनगो | 293.00 kb |
| शहरी सहकारी बैंकों को प्रासंगिक बनाए रखने में सक्षक्त गवर्नेंस और सुरक्षित आईटी परिचालनों का महत्व –एन.एस.विश्वनाथन | 353.00 kb |
| लोक ऋण रजिस्ट्री और माल एवं सेवा कर नेटवर्क : भारत में ऋण को सर्वसुलभ एवं औपचारिक बनाने के लिए लंबे कदम भरना – विरल वी. आचार्य | 466.00 kb |
| खुदरा भुगतानों में नवाचार : डॉ ऊर्जित आर पटेल | 130.00 kb |
| मेघनाद देसाई एकेडमी ऑफ इकोनॉमिक्स में दीक्षांत समारोह के अवसर पर उदघाटन भाषण – डॉ. उर्जित.आर. पटेल | 135.00 kb |
| भुगतान के क्षेत्र में उत्कृष्टता – बी. पी.कानूनगो | 142.00 kb |
| ऋणदाताओं और उधारकर्ताओं के लिए कारोबार अब सामान्य /पहले जैसा नहीं रहा – एन.एस.विश्वनाथन | 393.00 kb |
| बैंकिंग विनियामकीय शक्तियां स्वामित्व निरपेक्ष होनी चाहिए - उर्जित आर पटेल | 200.00 kb |
| भारत के आर्थिक सुधार: अपूर्ण कार्यक्रमों के संबंध में चिंतन - विजय जोशी | 266.00 kb |
| बैंकों में ब्याज दर जोखिम को समझना और प्रबंध करना - विरल आचार्य | 605.00 kb |
| विनियमन और वित्तीय़ स्थायित्व - एन.एस.विश्वनाथन | 213.00 kb |
| वित्तीय प्रणाली और समष्टि अर्थव्यवस्था पर कैफराल सम्मेलन : उद्घाटन वक्त्व्य - उर्जित आर पटेल | 146.00 kb |
| भारत की मौद्रिक नीति समिति के कार्यकाल का एक वर्ष-माइकल देबब्रत पात्र | 260.00 kb |
| भारत में मौद्रिक नीति का संचरण: यह क्यों महत्वपूर्ण है और इसने ठीक से काम क्यों नहीं किया- विरल वी. आचार्य | 330.00 kb |
| भावी संकट से बचने के लिए वित्तीय विनियमन और आर्थिक नीतियाँ - उर्जित आर पटेल | 184.00 kb |
| अधुरी कार्यसूची: भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के स्वास्थ्य को पुन: बहाल करना - विरल वी. आचार्य | 793.00 kb |
| कृषि ऋण पर माफी पर सेमिनार- प्रभावशीलता और सीमाएं आरंभिक व्याख्यान-उर्जित आर पटेल | 615.00 kb |
| दबावग्रस्त आस्तियों का निवारण: अंतिम अवस्था की तरफ- उर्जित आर पटेल | 509.00 kb |
| प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र को उधार - वर्तमान स्थिति, समस्याएं और आगे की कार्ययोजना - एस.एस.मूंदड़ा | 230.00 kb |
| भारत में लोक ऋण रजिस्ट्री - विरल वी आचार्य | 191.00 kb |
| बैंकर और SME उधारकर्ता - नये मंत्र - एस.एस.मूंदड़ा | 215.00 kb |
| बैंकों में ग्राहक सेवा: मानक उँचे करने का समय - एस.एस.मूंदड़ा | 209.00 kb |
| बैंक कुछ ऐसा होना चाहिए जिसपर भरोसा किया जा सके - विरल वी. आचार्य | 281.00 kb |
| निवेशक की रुचि में सुधार लाना- हाल के विधायी और विनियामकीय उपाय- आर गांधी | 222.00 kb |
| वित्तीय प्रोद्योगिकी(फीन टैक्स) और आभाषी मुद्रा-आर गांधी | 174.00 kb |
| बैंक की दबावग्रस्त आस्तियों का दृढ़तापूर्वक समाधान करने के कुछ तरीके- विरल वी.आचार्य | 213.00 kb |
| भुगतान प्रणाली –अगला पड़ाव-आर गांधी | 168.00 kb |
| एमएसएमई वित्तपोषण: बैंक और वित्तीय प्रोद्योगिकी (फिनटेक)-प्रतिस्पर्धा,सहकार्य अथवा प्रतिस्पर्धी सहकार्य ?- एस.एस.मुंदड़ा | 204.00 kb |
| बैंकों में धोखाधड़ी का नियंत्रण: क्या करें और क्या न करें - एस.एस.मूंदड़ा | 198.00 kb |